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‘बस्तर बटालियन’ नक्सलियों से लोहा लेने के लिए तैयार, 21 मई से उतरेंगी मैदान में ‘मर्दानी’

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के सामने पासिंग आउट परेड

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नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह अगले हफ्ते ‘बस्तरिया’ बटालियन (सीआरपीएफ) शुरू करेंगे जिसमें छत्तीसगढ़ के 739 आदिवासी युवक-युवतियों को शामिल किया गया है। इस तरह की बटालियन का पहली बार गठन किया गया है। सिंह 21 मई को राज्य के अंबिकापुर शहर में सीआरपीएफ के प्रशिक्षण केंद्र में 739 युवा रंगरूटों की पासिंग आउट परेड में शामिल होंगे। इन रंगरूटों में 198 महिलाएं हैं। बटालियन को सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में तत्काल नक्सल रोधी अभियानों में शामिल किया जाएगा। इन रंगरूटों का चयन अविभाजित बक्सर क्षेत्र के सुकमा, दंतेवाड़ा , नारायणपुर और बीजापुर जिलों से किया गया है। एक अधिकारी ने नाम सार्वजनिक ना करने के अनुरोध के साथ बताया कि बटालियन का नाम ‘बस्तरिया’ इसलिए रखा गया क्योंकि उसके सदस्य बस्तर क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि 21 मई को बटालियन के सदस्यों को कांस्टेबल रैंक मिल जाएगा और वे नियमित सुरक्षा बल कर्मियों की तरह नक्सलियों से लोहा लेंगे।
अधिकारी के मुताबिक रंगरूट करीब एक साल से जंगल में युद्ध कला , हथियार प्रशिक्षण, नक्शे पढ़ने, पुलिस कानूनों एवं शस्त्रहीन लड़ाई का प्रशिक्षण ले रहे थे। बटालियन में कुल 739 कर्मी होंगे और उसमें कुछ युवा लेकिन नियमित लड़ाकू बल कर्मी और अधिकारी भी शामिल होंगे ताकि युवा खून और अनुभव दोनों ही उसका हिस्सा हों। गृह मंत्री पासिंग आउट परेड में शामिल होने के बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नक्सल समीक्षा बैठक करेंगे और उसके बाद दिल्ली लौट आएंगे। केंद्र ने पिछले साल जुलाई में बटालियन शुरू करने को मंजूरी दी थी। बटालियन के गठन का मकसद बेरोजगारी जैसे स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना, अभियानों, खुफिया जानकारी जुटाने और भाषा संबंधी लाभ के संबंध में सीआरपीएफ को रणनीतिक बढ़त देना है।

‘लालगढ़’ में उतरेंगी बटालियन की मर्दानी

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के गुरिल्ला वार का जवाब अब उनकी मांद में घुसकर बस्तरिया बटालियन की मर्दानी देंगी। सीआरपीएफ की बस्तरिया बटालियन की पहली खेप में 198 महिला जवान ट्रेनिंग के बाद नक्सल मोर्चे पर उतरने को तैयार हैं। पहले बैच के 739  जवानों की पासिंग आउट परेड 21 मई को अंबिकापुर में सीआरपीएफ कैंप में होगी।

स्थानीय होने के कारण इन जवानों को नक्सलियों की राजधानी कहे जाने वाले अबूझमाड़ की भौगोलिक स्थिति का पूरा ज्ञान है। ऐसे में स्थानीय लड़ाकों की जानकारी और सीआरपीएफ जवानों के जज्बे के सामंजस्य से नक्सलियों की कमर तोडऩे में सफलता मिलेगी।

 

क्या है बस्तरिया बटालियन?
केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ़ अपनी नई ‘बस्तरिया बटालियन’ बनाई है। गृह मंत्रालय ने पहले ही इस बटालियन को अपनी मंज़ूरी दे दी थी। इस ‘बस्तरिया बटालियन’ में छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित बस्तर के चार ज़िलों के युवाओं की ही भर्ती हुई. भर्ती प्रक्रिया में सीआरपीएफ़ में भर्ती के लिए ज़रूरी क़द-काठी में भी इन युवाओं को छूट दी गई ।

भर्ती के बाद इस बटालियन को अगले पांच साल तक छत्तीसगढ़ में ही तैनाती दी जाएगी , ये बटालियन नक्सलियों से लोहा लेगी। इससे पहले पूर्वोत्तर में भी 90 के दशक में इस तरह की नागा बटालियन बनाई गई थी, लेकिन ये पहली बार है जब माओवाद प्रभावित किसी इलाके में बटालियन बनाने का काम हो रहा है।

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