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कांग्रेसी नेताओं की अंदरूनी कलह फिर आई सामने, चुनाव अभियान की बैठक में भूपेश-महंत का टकराव

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रायपुर। जब विचारों में भिन्नता दिखे तो फिर किसी भी मुद्दे पर बात बनना आसान नहीं है ऐसा ही कुछ माज़रा इन दिनों छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के अंदर साफ दिखाई दे रहा है। कांग्रेसी नेताओं की आपसी कलह यहां किसी से छिपी नहीं है। और अब तो नेताओं के आपसी विवाद भी खुलकर सामने आने लगे हैं। दरअसल जब चुनाव अभियान समिति की बैठक शुरु हुई तो पीसीसी चीफ़ भूपेश बघेल के सामान्य से सवाल ने चरणदास महंत को असहज कर दिया और मामला महंत के एक समर्थक विधायक ने और तल्ख कर दिया।हालाँकि भूपेश के जवाब ने तेज स्वर में बोलने वाले विधायक को सन्नाटे में ला दिया।

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बैठक शुरु हुई तो यह सवाल पीसीसी चीफ़ भूपेश की ओर से आया कि
“बैठक का ऐजेंडा क्या है “
यह चुनाव अभियान समिति की दूसरी बैठक थी और इस बैठक में ऐजेंडा ही गुल था, दूसरा जिस विषय ने पीसीसी अध्यक्ष को सवाल करने मजबूर किया वो था
“इस समिति की बैठक में डीसीसी अध्यक्षों को क्यो बुलाया गया, ये तो पीसीसी का काम है”
इसके ठीक बाद चरणदास महंत के समर्थक और बैठक में मौजुद महंत के लोकसभा क्षेत्र के विधायक जय सिंह अग्रवाल ने पीसीसी चीफ़ भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल का सीधा नाम लिया और कहा
“वे टिकट बाँट रहे है ये कौन सी बात हुई”
बताते हैं कि पीसीसी चीफ़ भूपेश ने छूटते ही जवाब दिया
“वे तो मेरे खिलाफ प्रचार कर चुके, पहले जानिए फिर कहिए वैसे ऐसा कौन है जो टिकट नही बाँट रहा है”
हालाँकि इस के बाद बैठक जैसे तैसे संपन्न हो ही गई। पर इस बैठक ने सवाल खड़ा कर दिया कि एकता का मठ जिसे पुनिया बसाने की कवायद कर रहे हैं वो महंत बसा ले जाएँगे या महंत जवाबदेह बन जाएँगे कि मठ बनने के पहले बैठ गया।
दरअसल पीसीसी चीफ़ भूपेश बघेल और पूर्व केंद्रीय मंत्री और चुनाव समिति प्रभारी चरणदास महंत के बीच टकराव नया नही है,मतभेद अरसे से जारी है, जांजगीर ज़िलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर विवाद शुरु हुआ था जो अब सतह पर आ गया है। खैर चुनावी साल में जो कुछ हो वह सब नया है आगे क्या होगा ये कहना इतना आसान नहीं है।

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