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जानिए छत्तीसगढ़ में क्या है रोजगार का हाल, पिछले 4 साल में कितने युवाओं के हाथों को मिला काम ?

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की सत्ता में 15 साल बीजेपी काबिज रही..रोजगार देने के वादे किए गए…लेकिन क्या इन पंद्रह सालों में सरकार ने रोजगार को लेकर जो वादे किए वो पूरे हुए…आज हमने इस बात की पड़ताल की…और 27 जिलों को छोड़कर राजधानी रायपुर में रोजगार का हाल जाना…और जो आंकड़ें आए वो सोचने को मजबूर करते हैं कि कितने युवाओं के हाथों में काम है.. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2018 के दौरान सिर्फ 4 साल में अकेले राजधानी में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 1 लाख 7 हजार 463 है। इन बेरोजगारों में से केवल 3 हजार 213 लोगों को ही नौकरी मिल पाई है..वो भी प्राइवेट संस्थानों की बदौलत..एक अनुमान के मुताबिक 27 जिलों में 20 लाख से ज्यादा बेरोजगार रोजगार पंजीयन कार्यालय में पंजीकृत है..ऐसे में केवल रायपुर की बात करें तो यहां 1 लाख 763 बेरोजगारों में से 3213 लोगों की ही नौकरियां लग पाई.यानी केवल 3 फीसदी युवा ही आज कमाई कर पा रहे हैं…अकेले राजधानी के जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र में वर्ष 2015 में 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक 17 हजार 753 बेरोजगारों की संख्या थी। इसी प्रकार वर्ष 2016 में 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक 19 हजार 965, 1जनवरी से 31 दिसंबर 2017 में 19 हजार 771, 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2018 तक 14 हजार 50 लोगों का पंजीकृत किया गया है। इस प्रकार राजधानी में ही 1 लाख 7 हजार 463 लोग बेरोजगार हैं। इनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक इनमें शामिल है। बता दें कि वर्ष 22 जून 2015 से 31 मार्च 2016 तक जिला रोजगार कार्यालय द्वारा 34 मेला और प्लेसमेंट कैंप का आयोजन किया गया था। साक्षात्कार के लिए 5 हजार 525 लोग शामिल हुए लेकिन सिर्फ 229 लोगों का ही चयन किया गया। इसी तरह 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 में 70 प्लेसमेंट कैंप हुए। इनमें 9 हजार 184 लोगों ने साक्षात्कार में हिस्सा लिया और 1103 लोगों को नौकरी मिली। 1 अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 में 86 कैंप 18 हजार 149 लोग साक्षात्कार दिए और सिर्फ 537 लोगों को रोजगार दिया गया। 1 अप्रैल 2018 से 31 दिसंबर 2018 में 36 मेला और प्लेसमेंट कैंप आयोजित हुए। 2 हजार 580 लोग साक्षात्कार में शामिल हुए लेकिन महज 1 हजार 344 लोगों को निजी क्षेत्र में काम मिल पाया था।

इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब एक अकेले राजधानी में इतने बेरोजगार युवाओं की फौज खड़ी है तो फिर प्रदेश के अन्य जिले का क्या हालात होंगे।

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