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नरक चतुर्दशी : जानें छोटी दिवाली का महत्व

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रायपुर।दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला पर्व नरक चतुर्दशी आज मनाया जा रहा है। इसे दिवाली और रूप चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन विशेष रूप से लक्ष्मी कुल की पूजा करने का विधान है। लक्ष्मी जी को जहां सुंदर और स्वच्छ प्रवास होता है, वहां वह अपने कुल के साथ आगमन करती हैं। वह अकेले नहीं आती। उनके साथ, नारायण, गणपति, शंकर जी, समस्त देवियां, कुबेर,, नक्षत्र और नवग्रह होते हैं। यही लक्ष्मी कुल सुख और समृद्धि का प्रतीक है।

स्वच्छता का संदेश –
नरक चतुर्दशी स्वच्छता का संदेश देती है। जिस घर में स्वच्छता नहीं, वहां लक्ष्मी जी अपनी बहन अलक्ष्मी के साथ प्रवेश करती है। जहां स्वच्छता होती है, वहां वह स्वयं प्रवेश करती हैं। यह स्वच्छता केवल बाहरी नहीं, तन-मन की पवित्रता से भी है।

क्यों जलाते हैं यम का दीया-
सभी प्रकार के नरक से मुक्ति देने का कार्य यम ही करते हैं। इसलिए, नरक चतुर्दशी की रात को यम के नाम का दीपक जलाया जाता है। एक दीपक कूड़े के ढेर पर भी रखा जाता है। भाव यह है कि हम गंदगी को अपने से दूर कर रहे हैं।

क्या है महत्व –
देवी लक्ष्मी धन की प्रतीक हैं। धन का अर्थ केवल पैसा नहीं होता है। तन-मन की स्वच्छता और स्वस्थता भी धन का ही कारक हैं। नरक चतुर्दशी के दिन घर के नरक यानी गंदगी को दूर किया जाता है। धन के नौ प्रकार बताए गए हैं।

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छोटी दिवाली पूजा का मुहूर्त –
अभ्यंग स्नान- प्रात: 05:08 से 6:44

चतुर्दशी- 5 नवंबर को रात्रि 11:46 से 6 नवंबर को रात्रि 10:27 तक

क्या करें

  • घर के बाहर यम का दीपक जलाएं.
  • कूड़े पर भी दीपक रखें और स्वच्छता का संकल्प लें।.
  • यह दिन पितृ देवताओं को भी याद करने का है। उनका स्मरण करें।

यम पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
प्रात: 6 नवंबर को 9:32 से 11:45 तक
दोपहर- 12:05 से 1:22 बजे तक
सायंकाल- 5:40 से 07:05 बजे तक

 

 

 

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