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खरसिया की माटी का सपूत एक बार फिर निकला, अपनी माटी की सेवा करने, हुआ आत्मीय स्वागत

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छत्तीसगढ़ की जमीन सोना उगलती है। इसकी मिट्टी में वो तासीर है जो सोना पैदा करती है। फिर चाहे वो यहां का धान हो या फिर इस सूबे की सेवा करने वाले पूत। इस मिट्टी ने न जाने कितने सपूत पैदा किए।जो आजादी से लड़ाई से लेकर आज तक इसकी सेवा कर रहे हैं। आज परिस्थितियां बदल चुकी है,लेकिन ये मिट्टी आज भी सेवकों को पैदा कर रही है। खरसिया की मिट्टी में जन्मा ऐसा ही एक सपूत है ओम प्रकाश चौधरी। जिसने पहले देश की सबसे मुश्किल परीक्षा पास करके कलेक्टर का पद हासिल किया। कलेक्टर के पद में रहते हुए ओपी ने नक्सल एरिया में अपनी प्लानिंग और दूरदर्शी से वो बदलाव लाया,जिससे इस प्रदेश का नाम रौशन हुआ। वक्त बीतता गया और ओपी की सोच अपनी मिट्टी के लिए कुछ और करने के लिए बड़ी होने लगी। लिहाजा ओपी ने वो फैसला लिया जो हर किसी की बस की बात नही।

फैसला जो आसान न था 
ओपी ने राजनीति में आने का फैसला लिया । इस फैसला से जहां हर कोई हैरान था वहीं दूसरा पहलू ये था कि एक ईमानदार, स्वच्छ छवि और दूरदर्शी सोच वाला नौजवान अफसर अपनी मिट्टी के लिए कुछ करना चाहता है।इसलिए ओपी ने राजनीति के सागर में आखिरकार गोता लगा दिया। ओपी ने 28 अगस्त को बीजेपी में प्रवेश लिया और शपथ ली की वो अपने प्रदेशवासियों के लिए कुछ करेंगे। राजनीति की तिलक लगाने के बाद ओपी ने अपने गृह ग्राम से अपनी यात्रा शुरू की।
भोले के दर से शंखनाद
आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी पहली बार अपने क्षेत्र पहुंचे।ओपी घुटने के बल बैठे और सबसे पहले माटी को अपने सिर पर लगाया।चौधरी का काफिला सक्ती से प्रारंभ हुआ । लगभग 15 सौ की भीड़ और लगभग 400 गाड़ियों के काफिले के साथ ओपी भोलेनाथ के धाम बरगढ़ पहुंचे । भगवान के आशीर्वाद के साथ ही लोगों का आशीर्वाद लिया। शिव जी के दर्शन के बाद चौधरी ने अपने क्षेत्र का पहला राजनीतिक भाषण इसी शिव की गोद में बैठकर दिया।

 

 

 

 

 

 

 

मां का लिया आशीर्वाद

 

जीवन की डगमग राहों में, पल पल साथ निभाती माँ,
उसको सच्चा दोस्त कहूँ मैं, मेरी पहली साथी माँ.
मुझ पर जब भी सुख आता है, दो पल को हँस लेती है,
दुख के रस्ते चलता जब भी, दूर तलक तक आती माँ.
उसने जीवन पढ़ा हुआ है, मैंने चार किताबों को,
फिर भी मैं घबराता हूँ जब, कितना कुछ समझाती माँ.

खरसिया में झलका ओपी का व्यक्तित्व
भाजपा पितृपुरुष लखीराम की धरती खरसिया पहुंचते ही ओपी ने दीनदयाल तथा लखीराम की मूर्तियों का माल्यार्पण किया। रोचक घटनाक्रम में जब समर्थकों ने ओपी को लड्डुओं से तौलना चाहा, तब अपनी व्यवहार की विनम्रता और अपनी सादगी का परिचय देते हुए ओपी ने वहीं खड़े हुए एक बुजुर्ग को लड्डूयों से तुलवाया। यह देख लोगों का प्यार इस हद तक उमड़ पड़ा की दीवाल, छत, पेड़ों पर चढ़ कर स्वागत करने लगे।

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