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सुपेबेड़ा बनेगा चुनावी मुद्दा…शुद्धपेयजल की समस्या से परेशान हैं लोग

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गरियाबंद में पानी पर राजनीति शुरु हो गई है, सत्ता पक्ष शुद्धपेयजल पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा कर रहा है मगर विपक्ष भाजपा के दावों को खोखला बताते हुए ग्रामीणों द्वारा आज भी दूषित पानी पीने का दावा कर रहा है।विपक्ष अब इसे चुनावी मुद्दा बनाने में जुटी है।किडनी की बीमारी से सुर्खियों में आए सुपेबेडा गांव को भला कौन भूल सकता है। दूषित पानी पीने के कारण सुपेबेडा के 65 लोगो कि किडनी खराब होने से मौत हो चुकी है, वैसे गरियाबंद जिले की बिन्द्रानवागढ विधानसभा का सुपेबेडा अकेला ऐसा गांव नही है जहां के लोग आज भी दूषित पानी पीने पी रहे हो, बल्कि पीएचई विभाग की रिपोर्ट में दर्जनों ऐसे गांव सामने आ चुके है जहां का पानी पीने लायक नही है।

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यही हाल इस इलाके के स्कूलों का भी है, पीएचई विभाग ने 74 स्कूलों में लगे हैंडपंप के पानी में फलोराईड और आयरन की मात्रा ज्यादा पायी जाने पर इसे पीने से मना कर दिया है मगर कोई वैक्लपिक व्यवस्था नहीं होने के कारण इलाके के ग्रामीण हो या फिर स्कूली बच्चे हों इसी दूषित पानी को पीने मजबूर है। चुनाव नजदीक आते ही पानी के इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है, सतापक्ष भाजपा इलाके में शुद्धपेयजल उपलब्ध कराने के लाख दावे करे मगर विपक्ष जमीनी हकीकत से वाकिफ होने के कारण इस मुद्दे को छोडना नही चाहती बल्कि चुनाव में इस मुद्दे को जोरशोर से उठाने की तैयारी में जुटी है, कांग्रेस और जोगी कांग्रेस पानी को प्रत्येक गांव-घर का मुद्दा मानते हुए इसे चुनावी रंग में रंगना चाह रही है। जिले में खासकर जिले की बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा में शुद्दपेयजल एक बडी समस्या है, राजनीतिक पार्टियां इसे चुनावी मुद्दा बनाने में कामयाब होती हैं या नहीं या फिर इस मुद्दे से किसे लाभ मिलता है और किसे नुकसान उठाना पड सकता है ये सवाल राजनीतिक पार्टियों के लिए अहम हो सकता है, क्षेत्र की जनता के लिए आज भी यही सबसे बडा मुद्दा है कि आखिर उन्हें शुद्द पेयजल कब उपलब्ध होगा?

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