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करु भात से तिजहारिन शुरू करेंगी पति की लंबी उम्र का व्रत हरितालिका तीज

रायपुर-पद्मा कुलदीप

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छत्तीसगढ़ में भाद्रपद के शुक्ल पक्ष के तृतीय दिन मनाए जाने वाले तीज पर्व का विशेष महत्व है। पति के दीर्घायु जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना का पर्व तीजा बुधवार को मनाया जाएगा। इससे पहले आज रात तीजहारिन महिलाएं करु भात खाकर अपना व्रत शुरु करेंगी। 24 घंटों तक महिलाएं तीज का निर्जल व्रत रखेंगी। महिलाएं इस दौरान बगैर कुछ खाए-पिए भगवान शिव और पार्वती की आराधना करेंगी। पारंपरिक वेश-भूषा और सोलह श्रृंगार से सज – धज कर पति की लंबी आयु के लिए सुहागिनें इस व्रत को रखती हैं और कुंवारी लड़कियां अच्छे वर के लिए तीज का व्रत रखती हैं। छत्तीसगढ़ की मान्यता के कारण तीजा के मौके पर बेटियों को ससुराल से मायके लाकर आवभगत करने के कारण दूरदराज में रहने वाली बहनों के ससुराल से भाई उन्हें लेकर मायके आते हैं। वहीं तीजा पर्व हर्षोल्लास से मनाने के बाद माता-पिता अपनी बेटियों को उचित भेंट देकर उन्हें विदा करते हैं। तीजा मनाने के पीछे ऐसी मान्यता है कि जब हिमालय के राजा दक्ष अपनी पुत्री पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे, लेकिन पार्वती ने भगवान शंकर को ही अपना पति मान लिया था। जब पार्वती ने यह बात अपनी सहेली को बताई तब उनकी सहेली ने राजा दक्ष के महल से तीज के दिन पार्वती का हरण कर उन्हें जंगल में ले गईं इसलिए इसे हरतालिका तीज भी कहा जाता है। शंकरजी को पाने के लिए इसी दिन पार्वती ने दिन-रात बिना कुछ खाए पिए कठोर तपस्या की थी। इसके बाद पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर शंकरजी ने पार्वती से विवाह किया। कहा जाता है कि इस दिन माता पार्वती और शिवजी के मंडप को भी सजाया जाता है।  तीजा पर इसी मान्यता के चलते कुंवारिया श्रेष्ठ वर पाने तथा सुहागिनें पति की सुख-समृद्धि और लंबी आयु के लिए उपवास रहकर पार्वती-शंकर की पूजा-अर्चना करती हैं।

कृष्णा नगर की ज्योति का कहना है कि तीजा और पोला पर्व पर बनाए जाने वाले ठेठरी-खुरमी पकवान का खास महत्व है। इस दिन घरों-घर ये बनाया जाता है। घर पर बनाए जाने वाले ठेठरी, खुरमी और अइरसा की बात ही अलग होती है। वहीं तीजा का उपवास भाद्रपद शुक्ल पक्ष के द्वितीया तिथि रात 12 बजे से तृतीया की रात 12 बजे तक उपवास किया जाता है। तीजा उपवास में माता पार्वती और भगवान शंकर की पूजा-अर्चना की जाती है।

रायपुर से देवभोग तीजा मनाने जा रही अन्नपूर्णा ने बताया कि साल में एक बार तीजा पर्व पर मायके जाने का सौभाग्य मिलता है। यह पर्व महिलाएं अपने मायके में ही मनाती हैं। विशेष स्थिति में ससुराल में भी मनाया जा सकता है। उनका कहना है कि भाई या पिताजी इस पर्व पर अपने बेटियों को लाने ससुराल आते हैं। पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत किया जाता है। कुछ ऐसा ही कहना था खुशबू, सुनीता, लक्ष्मी, अगनी बाई जैसी अन्य महिलाओं का भी।

करू भात खाने के पीछे की मान्यता

उपवास से पहले के करू भात खाए जाने को लेकर मान्यता है कि माता पार्वती अपने उपवास के दौरान कठिन तप कर रही थी और उस समय उन्हें अपने व्रत प्रारंभ करने से पहले कड़वे चीजों का सेवन किया था तभी से ही ये परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है व्रत से पहले रात को करेले की सब्जी और चावल खाया जाता है।  तीजा व्रत के पहले प्राय: हर घर में करेले की सब्जी और चावल खाकर ही इस व्रत को किया जाता है।

करेले खाने के पीछे वैज्ञानिक तथ्य ये हैं कि करेले खाने से प्यास कम लगती है, इससे बॉडी की इम्यूनिटी पावर अच्छी रहती है। इसलिए तीजा व्रत से पहले तीजहारिन करेले का सेवन करती हैं।

भारतीय संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से रखी गयी प्रतियोगिता…

वहीं तीज के उपलक्ष्य में राजधानी रायपुर के अग्रसेन महाविद्यालय में भी तीज महोत्सव का आयोजन किया गया। विद्यालय में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों और मेंहदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। आयोजन का मुख्य उद्देश्य केवल यही था कि स्टूडेंट्स को भारतीय संस्कृति की जानकारी देना, और भारतीय संस्कृति से जोड़ना। प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के विभिन्न व्यंजनों को परोसा गया जिसमें फरा, चिला, अनरसा, ठेठरी और खुरमी।

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