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आखिर क्यों बेजुबान की मौत से पसरा पूरे गांव में मातम, यादें ही बाकी, आंसुओं से दी विदाई

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बेमेतरा। अगर किसी तालाब या नदी में आपका सामना मगरमच्‍छ से हो जाए तो आपको अपने सामने साक्षात मौत नजर आएगी. सामने मुंह फाड़े खड़ी मौत को देखकर अच्‍छे-अच्‍छे के रौंगटे खड़े हो जाएंगे. लेकिन क्‍या कोई मगरमच्‍छ पूरे गांव के लिए इतना प्‍यारा हो सकता है जिसके मरने पर क्‍या बूढ़ा, क्‍या जवान, बच्‍चे या महिलाएं, जिनकी आंख नम न हुई हो. यह कहानी कोई फिल्‍मी नहीं है. छत्‍तीसगढ़ के बेमतरा जिले के मोहतरा गांव की है.

बाबा मोहतरा गांव के मगरमच्छ की मंगलवार सुबह मौत हो गई. मगरमच्छ के मौत की खबर मिलते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. वन विभाग और पुलिस की टीम ने मगरमच्छ के शव को तालाब से बाहर निकाला. मगरमच्छ की उम्र लगभग 100 से 150 साल बताई जा रही है. इस मगरमच्छ की खास बता थी ये किसी पर हमला नहीं करता था. प्रशासन ने इसे तालाब से हटाने की कोशिश भी की लेकिन लोगों के विरोध के चलते इसे तालाब में ही रहने दिया गया. लोगों ने इस मगरमच्छ का नाम गंगाराम रखा था. गंगाराम की मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है.

तलाबा पार बनेगा गंगाराम का स्मारक

एक जीव से इंसानी प्रेम और दिल का रिश्ता देख वन विभाग की टीम भी भाव-विभोर हो उठी. वन विभाग के एसडीओ आरके सिन्हा बातचीत में कहा कि सुबह गांव वालों से मगरमच्छ गंगाराम के निधन की खबर मिली. टीम मौके पर पहुँची. टीम ने गंगाराम का पीएम किया. पीएम रिपोर्ट अभी आई नहीं तो मौत का कारण पता नहीं. लेकिन गांव वालों की मांग और विनम्र आग्रह पर हमने गंगराम को गांव में दफन कर दिया. गांव वालों की मांग के मुताबिक उसी तालाब के पार पर जिस तालाब में गंगाराम रहा है. अधिकारी सिन्हा ने यह भी बताया कि गांव वाले वहां गंगराम का स्मारक बनाना चाहते हैं. तो ये थी मगरमच्छ गंगाराम की दिल छू लेने वाली कहानी. ऐसी सच्ची कहानियां बहुत कम पढ़ने को मिलती है. लेकिन कभी अगर मिले तो जरूर पढ़ें. क्योंकि क्या पता आपको कब कहां कोई गंगाराम मिल जाए.

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