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आज खुलेगा नागलोक का रहस्य!

धरती पर आज भी मौजूद है नागलोक

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जशपुर।सांपों का जिक्र होते ही लोग अक्सर डर जाते हैं ऐसे में यदि धरती पर नागलोक की बात करें तो आपको शायद यकीन नहीं होगा,लेकिन छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में आज भी मौजूद है नागलोक,जहां हर तरफ नजर आते हैं सिर्फ सांप ही सांप,यहां के लोगों का जीवन सांपों की बीच ही बीत जाता है,जशपुर का इलाका आदिवासी बहुल क्षेत्र है जो कि जंगलों से घिरा हुआ है यहां हर क्षेत्र में सांप मौजूद हैं, लेकिन फरसाबहार से लेकर तपकरा के बीच सांपों की भरमार है यहां 40 प्रजातियों के सांप मिलते हैं.हर साल क्षेत्र के सैंकड़ों लोग सांप के काटने की वजह से मौत के मुंह में समा जाते हैं.बारिश के दिनों में इस इलाके में नंगे पैर चलने का मतलब मौत को आमंत्रण देना है.सांपों के डसने की वजह से लोगों की मौत हो जाती है लेकिन बावजूद इसके गांव के लोग इस क्षेत्र को नागलोक कहना ही पसंद करते हैं.

रहस्यों से भरा शिवालय और नागलोक

जशपुर के तपकरा में एक प्राचीन शिव मंदिर मौजूद है, ये मंदिर कितना पुराना है इसका कोई ठोस प्रमाण किसी के पास भी मौजूद नहीं है, लेकिन प्रचलित किंवदंतियों के अनुसार कोई इसे द्वापर युग से जोड़ता है तो कोई इसे त्रेता युग का बताता है.तपकरा का इलाका जंगलों से घिरा हुआ है जंगलों को चीरते हुए बहती है ईव नदी,इस नदी के एक किनारे पर प्राचीन शिव मंदिर स्थापित है तो दूसरे छोर पर एक गुफा मौजूद है.इस गुफा को लोग पातालद्वार के नाम से जानते हैं,कहते हैं इस गुफा के अंदर जो भी जाता है वो वापस बाहर नहीं आता. फिलहाल लोगों की सुरक्षा के चलते गुफा को एक बड़े पत्थर से बंद कर दिया गया है.

Eastern brown snake (Pseudonaja textilis)

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भगवान राम स्वयं करते थे प्राचीन शिव मंदिर में पूजा

प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक ग्रामीण कहते हैं कि इस प्राचीन शिव मंदिर में भगवान श्री राम ने पूजा की थी,जशपुर क्षेत्र दंडकारण्य में आता है भगवान राम के इस क्षेत्र में आने के प्रमाण भी मिलते हैं.वनवास के समय भगवान राम और माता सीता ने ईव नदी के किनारे स्थापित शिव मंदिर में पूजा की थी.भगवान राम के जाने के बाद शिव मंदिर की नाग देवता स्वयं रक्षा किया करते थे,ग्रामीणों ने कई बार शिव मंदिर के पास काले रंग के नाग को देखा है.रावण की बहन शूर्पनखा भी जशपुर के चिरैया डांड नामक जगह पर भगवान शिव की आराधना किया करती थी.कहते हैं इस पूरे इलाके में त्रेता युग में शूर्पनखा का ही आधिपत्य था.

महाभारत काल से भी है संबंध


इव नदी का संबंध महाभारत काल से भी है.किंवदंतियों के मुताबिक द्वापर युग में दुर्योधन ने भीम को जहरीली खीर खिला दी थी,और बेहोशी की हालत में उन्हें नदी में बहा दिया था, जिसके बाद नदी में बहते-बहते भीम इव नदी तक आ गए थे.जिसके बाद नाग लोक में स्नान कर रहीं नाग कन्याओं ने भीम का इलाज किया और उनकी जान बचाई, नागलोक से वापस लौटते समय ही भीम को सौ हाथियों का बल मिला था, जिसके बाद से नागलोक में इंसानों का प्रवेश वर्जित है.

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